शिशु के पोषण के लिए रखें अपना ख्याल

शिशु की सेहत का राज स्तनपान में छिपा है | पर क्या इसके लिए माँ शारीरिक रूप से तैयार है ?

how to care baby and her mother while pragnancy
Take care of baby and mother both

पहली बार माँ बनने वाली युवतियों के लिए मातृत्व सुख उमंग और उत्साह से भरा होता है, लेकिन  इस प्रक्रिया  में वे अक्सर अपनी सेहत की अनदेखी करने लग जाती है | वे समझ ही नहीं पति कि खुद की सेहत की देखभाल का सम्बन्ध उनके लाडले की अच्छी सेहत से होता है, खासकर जब वे अपने नवजात को स्तनपान करा रही होती है |

शिशु के जन्म के बाद छह महीने  तक शिशु अपनी पोषाहार जरूरतों के लिए पूरी तरह से अपनी माँ पर निर्भर  रहता है | दुग्धपान के दौरान पोष्टिक जरूरतें अधिक रहती है और यदि इन्हें पूरा न किया जाए तो माँ और नवजात की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है |



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क्या है स्तनपान के फायदे 

स्तनपान से न सिर्फ शिशु स्वस्थ रहता है, बल्कि माँ के लिए भी यह फायदेमंद है | माँ के पीले दूध में  पोषाहार की उचित मात्रा और प्रकार, इम्युनोलोजिकल अवयवों तथा तत्वों का अनूठा सम्मिश्रण रहता है  | इससे बच्चा स्वस्थ बना रहता है | यह बच्चे की सांस सम्बन्धी संक्रमण और एलर्जी से रक्षा करता है | आगे चलकर उनमें मोटापा, डायबिटीज आदि का खतरा भी कम रहता है | माँ के लिए स्तनपान उन्हें गर्भधारण के दौरान बढे वजन को घटने में भी मदद करता है और उनमें ब्रेस्ट तथा ओवरियन कैंसर की आशंका भी कम करता है |   

क्या ध्यान रखें माताएं

ज्यादा कैलोरी लें 

गर्भावस्था के मुकाबले स्तनपान काल में प्रतिदिन 250 कैलोरी अधिक सेवन करने की जरुरत पड़ती है | इस बात का ख्याल रखना भी जरुरी है की कैलोरी की यह अतिरिक्त मात्रा पोष्टिक खाद्य स्त्रोतों से ली जाए | शिशु जन्म के बाद शुरूआती छह महीने के दौरान प्रतिदिन लघभग 650 मिली दूध बनता है | यदि भोजन के स्त्रोतों से उर्जा की अतिरिक्त मांग पूरी न की जाए तो इसके लिये माँ के शरीर में जमा फैट का इस्तेमाल होने लगता है |
 

कैल्शियम की कमी न होने दें 

स्तनपान के दौरान कैल्शियम जरुरी तत्व होता हैं, क्योकि दूध बनाने में इसकी जरुरत पड़ती है | स्तनपान के दौरान प्रतिदिन 1200 मिग्रा कैल्शियम का सेवन करने की सलाह दी जाती है | कैल्शियम का सर्वोत्तम स्त्रोत दूध, दही और चीज, रागी, अलसी और हरी पत्तीदार सब्जिया है | एक कप दूध या दही में 300 मिग्रा कैल्शियम होता है | 

भरपूर पेय पदार्थ लें 

जितनी भी बार बच्चे को दूध पिलाएं उतनी बार एक गिलास पानी पिए | पानी के  अलावा जूस, दूध, सूप, हर्बल टि तथा शोरबे आदि का सेवन भी करे | वजन घटने वाली दवाओं से भी बचे | 

क्वालिटी प्रोटीन का सेवन करें

माँ के दूध में मोजूद प्रोटीन नवजात शिशु को पहले   वर्ष में तेजी से विकास करने में मदद करता है | प्रसव के बाद शुरूआती छह महीने के दौरान प्रतिदिन प्रोटीन की आवश्यक मात्रा रेकमेंडेड डायटरी अलाउंस(आरडीऐ) लघ्बह्ग 78 ग्राम होती है | पर्याप्त प्रोटीन  के साथ उसकी गुणवत्ता भी मायने रखती है | जिस प्रोटीन में सभी प्रकार के आवश्यक एमिनो एसिड मोजूद रहते है, उसे उच्च  गुणवत्ता का प्रोटीन माना जाता है | इसके समृद्ध स्त्रोतों में चीज और दूध शामिल है | बादाम, फलियां तथा बीन में भी प्रोटीन के अच्छे स्त्रोत होते है | मांसाहार में मीट, सीफूड तथा अंडो में अच्छा प्रोटीन पाया जाता है |  

भोजन में आयरन बढाएं 

शिशु के जन्म के पहले माँ को जितनी आयरन की आवश्यकता की जरुरत होती है, उसी अनुपात में बाद में भी इसकी आवश्यकता होती है | यह ऑक्सीजन प्रवाहित करने, मांसपेशियों को सुचारू रखने तथा कोशिकाओं के विकास में अहम भूमिका निभाता है | माँ के दूध में यदि आयरन की पर्याप्त मात्रा न हो, तो बच्चे को समुचित विकास भी प्रभावित होता है | स्तनपान के दौरान प्रतिदिन 25 मिग्रा आयरन सेवन करने की सलाह दी जाती है | आयरन की कमी दूर करने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, बीन्स, फलियां, बादाम, तथा अंकुरित अनाज लें | मीटी व सीफ़ूड में भी आयरन होता है |


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शिशु के पोषण के लिए रखें अपना ख्याल शिशु के पोषण के लिए रखें अपना ख्याल Reviewed by Deepak Gawariya on August 18, 2017 Rating: 5

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