सुकून से बनता है घर
अपना घर किसे नहीं भाता | पहले मध्यवर्गीय लोग उम्र भर कमाते थे और इससे जमा हुई राशी से अपने सपनो का घर खरीदते थे, पर आज जमाना बदल गया है | आज बाजार में ऐसे लुभावने आवास-ऋण (होम लोन) के मौके उपलब्ध है की अपने मकान में रहने के लिए ताउम्र धैर्य रखने कि आवश्यकता नहीं है | हालांकि जमीं खरीदकर मकान बनवाने के लिए साडी औपचारिकताए आपको स्वयम ही पूरी करनी पड़ती है | परन्तु अगर आप किसी शहर या महानगर में फ्लैट खरीदना चाहे, तो इस बाबत इच्छा व्यक्त करते ही फ्लैट बनाने कौर बेचने वाली कम्पनियां बड़े सहज तरीके से होम लोड उपलब्ध करने का भरोसा दिलाती है | फ्लैट खरीदार को ऋण लेकर फ्लैट खरीदने के वक्त इन बातो का ध्यान देना चाहिए...
शहरों या महानगरों में इन दिनों ऋण को लेकर फ्लैट खरीदना एक आम चलन है | परन्तु ऋण लेते वक्त कुछ बातों पर ध्यान देना जरुरी है, अन्यथा यह आपके लिए एक घाटे का सौदा भी बन सकता है |
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होम लोड को चुकाने के लिए ई.एम.आई. का प्रावधान होता है, जिसे ह इंडी में सरल मासिक किश्त कहते है |ई.एम.आई. में मूलधन और ब्याज दोनों ही शामिल होते है | यह एक ऐसी तय राशी है, जिसके नियमित भुगतान से नियत अवधि में कर्ज कि पूरी तरह से अदायगी हो जाती है | समय पर ई.एम.आई का भुगतान न हो, तो अतिरिक्त ब्याज के साथ पेनल्टी का भुगतान करना पड़ता है | अत: ऋण लेते समय यह सुनिश्चित करना जरुरी है कि ई.एम.आई उतनी ही हो, जितनी हर माय आसानी से अदा कि जा सके | ई.एम.आई. तय होने के बाद आमतौर पर पूर्ण ऋण चुकौती तक इस राशी में बदलाव कि गुंजाईश नही होती | अत: कर्ज की राशी और चुकौती कि अवधि पर बार-बार विचार किया जाना चाहिए, ताकि ई.एम.आई आपके लिए सरल हो और आप आसानी से इसे चूका पाएं |
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सरल हो ई.एम.आई.
होम लोड को चुकाने के लिए ई.एम.आई. का प्रावधान होता है, जिसे ह इंडी में सरल मासिक किश्त कहते है |ई.एम.आई. में मूलधन और ब्याज दोनों ही शामिल होते है | यह एक ऐसी तय राशी है, जिसके नियमित भुगतान से नियत अवधि में कर्ज कि पूरी तरह से अदायगी हो जाती है | समय पर ई.एम.आई का भुगतान न हो, तो अतिरिक्त ब्याज के साथ पेनल्टी का भुगतान करना पड़ता है | अत: ऋण लेते समय यह सुनिश्चित करना जरुरी है कि ई.एम.आई उतनी ही हो, जितनी हर माय आसानी से अदा कि जा सके | ई.एम.आई. तय होने के बाद आमतौर पर पूर्ण ऋण चुकौती तक इस राशी में बदलाव कि गुंजाईश नही होती | अत: कर्ज की राशी और चुकौती कि अवधि पर बार-बार विचार किया जाना चाहिए, ताकि ई.एम.आई आपके लिए सरल हो और आप आसानी से इसे चूका पाएं |
ब्याज-दर सही हो
डीलर्स फ्लैट कि खरीदारी पर आसानी से ऋण मुहैया करने का वादा करते है और इस वादे को पूरा भी करते है, परन्तु ब्याज-दर क्या हो, इस पर कोई कुछ तयशुदा नहीं बोलता | दरअसल ब्याज निर्धारण कि प्रक्रिया में खरीदार कि क्रेडिट-हिस्ट्री एवं अन्य अहम् चीजों को परखा जाता है, इसलिए ब्याज-दर हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकती है | अतएव कर्ज मंजूरी होने के बाद भी जरुरी नहीं कि आप कर्ज लें ही, यदि ब्याज-दर अनुचित लगे, तो आप ऋण लेने से मना कर सकते है | अन्य ऋणदाता कंपनियों द्वारा पेश किये जा रहे ब्याज-दरों का भी अध्ययन करना चाहिए |
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रहने के लिए खरीदें, निवेश के लिए नहीं
डीलर्स द्वारा अक्सर कहा जाता है कि यह फ्लैट निवेश के लिए खरीदना अच्छा होगा | कुछ समय बाद इसे बेच देने से अच्छा मुनाफा हो सकता है | इस कारण से कुछ लोग ऐसे फ्लैट्स भी खरीद लेते है, जिनमे शयद उम्रभर रहना पसंद न करें | मुनाफे के लालच में फ्लैट में निवेश नहीं करना चाहिए, क्योंकि बहुत संभव है कि जब आप बेचना चाहे, तो आपको सही खरीदार ण मिलें और चूँकि आप पहले ही हर माह ई.एम.आई चूका रहे है, अत: आपकी यह आर्थिक मज़बूरी बन जाएगी कि आप उसी फ्लैट में ही रहे | आमतौर पर ऋण लेंकर निवेश करने का विचार फायदेमंद नहीं होता |
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आयकर में छूट है, पर ध्यान रखे
आवास-ऋण चुकौती में मूलधन अथवा ब्याज के भुगतान की अलग-अलग आयकर रेतुर्न में दर्शाया जाता है | 1,50,000 रुपए तक मूलधन चुकौती पर यह राशि धरा 80-सी के तहत टैक्स डिडक्शन के लिए मान्य है | अगर ऋण पर लिए गए आवास में कोई खुद ही रह रहा हो तो 2 लाख तक के ब्याज की राशी की गणना धरा 24 के तहत टैक्स डिडक्शन के लिए होती है, लेकिन अगर मकान में गृह-स्वामी स्वयम नहीं रहता, तो मकान से होने वाली आय से होम लोन पर चुकी गई ब्याज कि पूरी राशि घटाकर इसे रिटर्न में दर्शाया जाता है | यदि आयकर में छूट का लाभ ले रहे है, तो यह भी याद रखें कि पांच साल कि अवधि तक अगर मकान का स्वामित्व अपने पास ण रहे और इसे इस अवधि से पहले ही आप बेच दे, तो पिछले वर्षों में होम लोन पर प्राप्त आयकर छूट कि भरपाई करनी पड़ती है |
इन विषयों को समझकर ही किसी शहर या महानगर में फ्लैट खरीदें | उम्र भर रुकने का धैर्य अब शेष न हो, तो कोई बात नहीं, कुछ दिनों तक थम्कने का धैर्य जरुर रखें, ताकि आप जब अपने फ्लैट में जाएं, तो एक मजबूत छत के साथ-साथ आपको सुकून कि छांव मिले | इस सुकून के लिए बस आपको संजीदगी के साथ उपरोक्त बातें परखनी होंगी और सुनिश्चित करना पड़ेगा कि इण विषयों में कोई लापरवाही न बरती जाए |
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सुकून से बनता है घर
Reviewed by Deepak Gawariya
on
September 26, 2017
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